योगी सरकार उत्तर प्रदेश को ‘सर्विलांस स्टेट’ में तब्दील करना चाहती है : भाकपा (माले)

लखनऊ। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) ने उत्तर प्रदेश की भाजपा-योगी सरकार पर राज्य को एक पूर्ण ‘निगरानी राज्य’ (सर्विलांस स्टेट) में तब्दील करने का आरोप लगाया है।

पार्टी ने कहा है कि प्रदेश में राजनीतिक विरोध और जन-आंदोलनों को कुचलने के लिए खुफिया तंत्र के जरिए नेताओं व कार्यकर्ताओं की निजी जिंदगी में गैर-कानूनी दखलंदाजी की जा रही है।

प्रशासन द्वारा बाकायदा दबाव बनाकर नेताओं से उनके ‘फैमिली ट्री’ (वंश वृक्ष), बैंक खातों के विवरण, आय के स्रोत, सोशल मीडिया प्रोफाइल, पहचान पत्र (आधार, पैन, पासपोर्ट), संपत्ति विवाद और निजी संपर्कों तक का ब्योरा मांगा जा रहा है। भाकपा (माले) ने इसे निजता के मौलिक अधिकार का खुला उल्लंघन बताते हुए इस कवायद को तुरंत रोकने की मांग की है।

भाकपा (माले) के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि 80वें स्वतंत्रता दिवस के ठीक बाद नागरिकों पर चौतरफा निगरानी का यह तानाशाही तंत्र विकसित किया जा रहा है। यह भाजपा के तथाकथित ‘विकसित भारत’ का असली भयावह चेहरा है। लालकिले की प्राचीर से प्रधानमंत्री द्वारा गढ़े गए ‘दिमागी नक्सल’ जैसे नफरती शब्द के बाद यूपी का पुलिस महकमा असहमति की आवाजों को दबाने के लिए अति-सक्रिय हो गया है।

कॉमरेड सुधाकर यादव ने कहा कि योगी सरकार छात्रों, युवाओं (जेन-जी व जेन-अल्फा) और सचेत नागरिकों के बढ़ते प्रतिरोध से पूरी तरह घबराई हुई है। सरकार को हर उस नागरिक से डर लग रहा है जो सवाल पूछता है, विरोध करता है और अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करता है। उत्तर प्रदेश को फर्जी मुठभेड़ों और हिरासत में मौतों के जरिए पहले ही ‘पुलिस राज’ बना दिया गया है, अब इसे पूर्ण ‘निगरानी राज्य’ बनाने की तैयारी है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि पीलीभीत, सीतापुर, बस्ती, अयोध्या, गाजीपुर, जालौन, मुरादाबाद, लखीमपुर खीरी, महाराजगंज और मथुरा सहित दर्जनों जिलों में पार्टी नेताओं-कार्यकर्ताओं को थानों और एलआईयू से फोन कर निजी जानकारियां मांगी जा रही हैं। पीलीभीत में तो बाकायदा व्हाट्सएप पर प्रोफार्मा भेजकर डेटा न देने पर अंजाम भुगतने तक की धमकियां दी जा रही हैं।

माले राज्य सचिव ने दो टूक कहा कि स्वतंत्र भारत के संविधान ने नागरिकों को निजता और अभिव्यक्ति की जो आजादी दी है, उस पर यह प्रशासनिक हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एक डरी हुई सरकार ही नागरिकों को डराने और उनकी जासूसी करने का रास्ता चुनती है। यदि राजनीतिक कार्यकर्ताओं को चिन्हित कर प्रताड़ित करने और उनका निजी डेटा जुटाने की यह तानाशाही प्रक्रिया तुरंत बंद नहीं हुई, तो पार्टी व्यापक जन-प्रतिरोध खड़ा कर सड़कों पर जवाब देगी।

(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित)

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